सावन में मेहंदी और चूड़ियों के बिना क्यों नहीं होता पूरा श्रृंगार? जानिए वजह
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सावन सिर्फ एक धार्मिक महीना ही नहीं है, बल्कि यह उत्सव, प्यार और सौंदर्य का भी पर्व है।
इस मौसम में महिलाएं सजती–संवरती हैं, झूला झूलती हैं और भगवान शिव व माता पार्वती की पूजा–अर्चना करती हैं।
शास्त्रों और लोक परंपराओं में स्पष्ट कहा गया है कि सावन का श्रृंगार तब तक अधूरा माना जाता है जब तक हाथों में मेहंदी की लाली और चूड़ियों की खनक न हो।
हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, सावन का पूरा महीना भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन की याद में मनाया जाता है।
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