आलोक नाथ सुप्रीम कोर्ट राहत : बॉलीवुड के ‘संस्कारी बाबूजी’ आलोक नाथ इस समय चर्चा में हैं, लेकिन वजह न उनकी कोई फिल्म है और न ही एक्टिंग। हरियाणा मार्केटिंग स्कैम मामले में उन्हें सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। उनकी गिरफ्तारी पर फिलहाल अंतरिम रोक लगाई गई है और इस मामले में अब नोटिस भी जारी किया गया है। आइए जानते हैं सागा ग्रुप घोटाले की पूरी कहानी, जिसमें यह अभिनेता फंसे हैं।
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बॉलीवुड के संस्कारी बाबूजी आलोक नाथ ने अपनी एक्टिंग से हमेशा दर्शकों को प्रभावित किया है, लेकिन उनकी पर्सनल लाइफ भी हमेशा सुर्खियों में रही है। अब एक बार फिर वह सागा ग्रुप घोटाले के मामले में खबरों में हैं। सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा मार्केटिंग स्कैम मामले में उन्हें राहत देते हुए गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही इस केस में कोर्ट ने नोटिस भी जारी किया है।
सुनवाई के दौरान जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों को ब्रांड एंबेसडर बनाने के बाद उनके बुढ़ापे का फायदा उठाना सही नहीं है। इस कथित मार्केटिंग फ्रॉड केस में उनके खिलाफ शिकायत दर्ज की गई थी, लेकिन मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश देते हुए उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी।
आलोक नाथ को राहत, क्या है मामला?
सुप्रीम कोर्ट ने आलोक नाथ की FIR को एक साथ जोड़ने की याचिका पर नोटिस जारी किया है, जो सागा ग्रुप घोटाला मामले से जुड़ा हुआ है। इस पर जस्टिस बीवी नागरत्ना की दो सदस्यीय बेंच ने कहा कि अगली सुनवाई तक कोई भी कड़ा कदम नहीं उठाया जाएगा। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में श्रेयस तलपड़े की गिरफ्तारी पर भी रोक लगाई थी।
सोनीपत के रहने वाले अंतिल की शिकायत के आधार पर श्रेयस तलपड़े और आलोक नाथ समेत कुल 13 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि दोनों एक्टर्स ने “ह्यूमन वेलफेयर क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड” के ब्रांड एंबेसडर के रूप में प्रमोशन किया। मुरथल के एसीपी अजीत सिंह के अनुसार,
यह शिकायत एक मल्टी–मार्केटिंग कंपनी के खिलाफ थी, जिसकी जांच फिलहाल चल रही है। उन्होंने बताया कि दोनों एक्टर्स इसके ब्रांड एंबेसडर थे और पीड़ितों को उनके नाम पर निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया था।
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शिकायत में बताया गया कि मामला 22 जनवरी को दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता का कहना है कि सोसायटी ने फाइनेंशियल स्कीम के जरिए लोगों को ठगने का काम किया। जानकारी के अनुसार, सोसायटी का गठन मल्टी–स्टेट कॉपरेटिव सोसाइटी एक्ट के तहत किया गया था और यह 16 सितंबर 2016 से हरियाणा समेत कई राज्यों में काम करने लगी थी।