दिल्ली NCR प्रदूषण : दिल्ली-NCR में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है, जिसका सीधा असर बच्चों और बुजुर्गों की सेहत पर पड़ रहा है. यही वजह है कि अस्थमा के मामलों में भी तेजी देखने को मिल रही है. ऐसे हालात में बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल कैसे की जाए, इस बारे में हमने डॉ. सुभाष गिरी से जानकारी ली।

पिछले कुछ समय से दिल्ली-NCR की हवा बेहद खराब श्रेणी में बनी हुई है. वातावरण में धूल, धुआं और PM2.5 PM10 जैसे प्रदूषक कण तेजी से बढ़ रहे हैं, जो सामान्य व्यक्ति की सांसें भी भारी कर दे रहे हैं. इस स्मॉग का सबसे ज्यादा प्रभाव बच्चों और बुजुर्गों पर दिखाई दे रहा है. लगातार प्रदूषण के संपर्क में रहने से खांसी, आंखों में जलन, सांस लेने में परेशानी और सीने में जकड़न जैसे लक्षण बढ़ रहे हैं, जिससे अस्थमा की दिक्कतें और गंभीर होती जा रही हैं।

प्रदूषण के महीन कण सीधे फेफड़ों तक पहुंचकर सूजन पैदा करते हैं, जिससे एयरवे संकुचित हो जाते हैं और अस्थमा ट्रिगर हो जाता है या पहले से मौजूद अस्थमा और बिगड़ जाता है. बच्चों के फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं होते, इसलिए जहरीली हवा उन्हें जल्दी प्रभावित करती है. वहीं बुजुर्गों में पहले से मौजूद सांस और हृदय संबंधी बीमारियां प्रदूषण के कारण और बढ़ सकती हैं. इसके सामान्य लक्षणों में लगातार खांसी, सीने में भारीपन, सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज़, तेज सांस चलना, जल्दी थकान होना और रात में सांस फूलना शामिल है. कई लोगों में आंखों में जलन और गले में खराश भी नजर आती है, जो दर्शाती हैं कि प्रदूषण सीधे फेफड़ों को नुकसान पहुंचा रहा है।

बढ़ते प्रदूषण में बच्चों और बुजुर्गों को अस्थमा से कैसे बचाएं?

आरएमएल अस्पताल के मेडिसिन विभाग के डॉ. सुभाष गिरी सलाह देते हैं कि प्रदूषण के चरम समय में बच्चों और बुजुर्गों को यथासंभव घर के अंदर रखें, खासकर सुबह और शाम के वक्त जब AQI सबसे ज्यादा खराब होता है. घर में एयर प्यूरीफायर का उपयोग करें और कमरों को धूलमुक्त बनाए रखें. यदि बाहर जाना जरूरी हो, तो N95 या N99 मास्क पहनाना बेहद जरूरी है।

शरीर में नमी बनाए रखने और सूजन कम करने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पिलाएं. यदि अस्थमा के लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर द्वारा सुझाए गए इनहेलर का नियमित उपयोग करें और दवाओं की खुराक में खुद बदलाव न करें. ठंडी हवा से बचाने के लिए बच्चों और बुजुर्गों को गर्म कपड़े पहनाएं. दिन में भाप लेना, हल्की एक्सरसाइज करना और घर का ताज़ा भोजन करना फेफड़ों को राहत देता है. स्थिति बिगड़ने पर या सांस लेने में कठिनाई होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना आवश्यक है।