Winter Blues : सर्दियों में सिर्फ शारीरिक सेहत ही नहीं, बल्कि कई लोगों की मानसिक सेहत पर भी असर पड़ता है। इस दौरान उदासी, कम ऊर्जा और थकान जैसे बदलाव महसूस होना आम है। इसी स्थिति को विंटर ब्लूज कहा जाता है। इस आर्टिकल में हम इसके लक्षण और इससे बचाव के तरीकों के बारे में जानेंगे।
Table of Contents
मौसम में बदलाव का प्रभाव शरीर के साथ–साथ मन पर भी पड़ता है। ठंड बढ़ने पर बहुत से लोग विंटर ब्लूज का अनुभव करते हैं, जिसमें मन नकारात्मक विचारों की ओर झुकने लगता है, और अक्सर समझ नहीं आता कि परेशानी क्या है। अगर तापमान गिरते ही आपको हल्की उदासी, थकान या सुस्ती महसूस होने लगती है, तो यह विंटर ब्लूज का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में जीवनशैली में कुछ छोटे लेकिन ज़रूरी बदलाव मददगार साबित होते हैं — जैसे खाने की आदतें सुधारना और रोजमर्रा के रूटीन में कुछ खास गतिविधियाँ शामिल करना। इस लेख में जानेंगे कि सर्दियों में एनर्जी क्यों कम होने लगती है और आप इस समस्या से कैसे निपटकर सीजन का आनंद ले सकते हैं।
जुकाम, खांसी और बुखार जैसी वायरल बीमारियाँ सर्दियों में आम होती हैं, लेकिन अगर ठंड आपकी मानसिक सेहत को प्रभावित करने लगे, तो इसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। विंटर ब्लूज अस्थायी होता है और मौसम सुधरने पर इसके लक्षण भी धीरे–धीरे कम हो जाते हैं। अब एक्सपर्ट की मदद से समझते हैं कि सर्दियों में विंटर ब्लूज से बचने के क्या उपाय हैं।
Winter Blues : विंटर ब्लूज के लक्षण
यदि आप विंटर ब्लूज का अनुभव करते हैं, तो उदासी या अकेलापन महसूस होना, चिड़चिड़ापन, लगातार थकान या सुस्ती, नींद का पैटर्न बिगड़ना—जैसे बहुत ज्यादा या बहुत कम नींद आना—फोकस कम होना और काम करने की इच्छा न होना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इस स्थिति में फिजिकल एक्टिविटी करने का मन नहीं करता और शरीर में ऊर्जा की कमी महसूस होती है, जिससे आपके रोजमर्रा के कामकाज भी प्रभावित होने लगते हैं।
विंटर ब्लूज क्यों होता है?
विंटर ब्लूज आमतौर पर मौसम में बदलाव के कारण होता है—जैसे पर्याप्त धूप न मिलना, खान–पान को मौसम के अनुसार न बदलना, या ठंड में अधिक मीठा और भारी भोजन करना। यह स्थिति गंभीर नहीं होती, लेकिन अपने रूटीन में कुछ सुधार करना जरूरी है। छोटे–छोटे बदलाव आपके मूड को बेहतर बनाने में मदद करते हैं और आप इस समस्या से आसानी से उबर सकते हैं।
डिटेल में एक्सपर्ट से जानें
फेलिक्स हॉस्पिटल के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. डी.के. गुप्ता के अनुसार, सर्दियों में दिन छोटे हो जाते हैं और धूप कम मिलती है, जिसके कारण शरीर में सेरोटोनिन और विटामिन D का स्तर घट सकता है। यही कमी उदासी, थकान, चिड़चिड़ापन और काम में रुचि कम होने जैसी समस्याओं को बढ़ा देती है। इसी स्थिति को विंटर ब्लूज कहा जाता है।
क्या हैं विंटर ब्लूज से बचाव?
डॉ. डी.के. गुप्ता बताते हैं कि विंटर ब्लूज से बचने के लिए रोज कम से कम 20–30 मिनट धूप में समय बिताना बेहद फायदेमंद है। इसके साथ ही हर सुबह हल्की एक्सरसाइज करना चाहिए, जिससे ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और शरीर अधिक एक्टिव महसूस करता है। नींद का ध्यान रखना भी जरूरी है—रात को समय पर सोना और सुबह समय पर उठना। रोजाना लगभग 7–8 घंटे की पूरी नींद लेना मानसिक और शारीरिक सेहत दोनों के लिए जरूरी है।
कैसी रखें सर्दियों में अपनी डाइट
विशेषज्ञों के अनुसार, विंटर ब्लूज से बचने के लिए हाई–कार्ब स्नैक्स से दूरी बनाना बेहतर है, क्योंकि ये शरीर में सुस्ती बढ़ा सकते हैं। इसकी जगह प्रोटीन और फाइबर से भरपूर हेल्दी फूड्स चुनें, जो आसानी से पचते हैं और लंबे समय तक एनर्जी देते हैं। साथ ही, अपनी डाइट में विटामिन D से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल करें। यदि जरूरत महसूस हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना भी जरूरी है। समय रहते लक्षण पहचानकर और सही लाइफस्टाइल अपनाकर आप पूरी सर्दियाँ खुद को मानसिक और शारीरिक रूप से फिट रख सकते हैं।