नमस्ते दोस्तों, आज खबर डेली अपडेट के इस पोस्ट में आपका स्वागत है। आज हम आपके लिए कंप्यूटर सामान्य जानकारी Computer General Knowledge in Hindi से संबंधित सम्पूर्ण जानकारी लेकर आए हैं, जिसमें आप जानेंगे कि कंप्यूटर क्या होता है? कंप्यूटर क्या है इन हिंदी के साथ-साथ कंप्यूटर शब्द का अर्थ क्या होता है? कंप्यूटर का पूरा नाम, कंप्यूटर डेटा संरचना परिचय, कंप्यूटर नेटवर्क और उनके प्रकार, माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस का परिचय, कंप्यूटर वायरस क्या होता है?

Table of Contents

हम जानेंगे कंप्यूटर प्रोग्रामिंग भाषाएं, इंटरनेट का परिचय और उनके प्रकार, इंटरनेट – शब्दकोश, और कंप्यूटर सामान्य ज्ञान के उत्तर के साथ कंप्यूटर उपयोग के फायदे और नुकसान, और कंप्यूटर नेटवर्क का मतलब। इस पोस्ट में हमें महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्राप्त होंगी।

Computer क्या है ?

कंप्यूटर क्या है: कंप्यूटर एक स्वचालित और निर्देशों के अनुसार कार्य करने वाली इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है, जिसमें किसी भी डेटा को प्राप्त, संग्रहित और प्रोसेस करने की क्षमता होती है। यह जान लेना महत्वपूर्ण है कि ‘कंप्यूटर’ शब्द का अर्थ क्या है, क्योंकि इसे अंग्रेजी के आठ शब्दों से बनाया गया है।

C- Commonly
O- Operated
M- Machine
P- Particularly
U- Used For
T- Technical
E- Education
R- Research

Computer शब्द की उत्पत्ति लेटिन भाषा के “Computare” शब्द से हुई है, जिसका हिंदी अर्थ है “गणना करना”। हालांकि, कुछ विशेषज्ञ कंप्यूटर शब्द की उत्पत्ति को “Compute” से मानते हैं, जिसका अर्थ होता है “गणना करने वाला”। इस प्रकार, कंप्यूटर मानव को किसी भी डाटा या संख्या की गणना में सहायता करने का काम करता है। हिंदी में, कंप्यूटर को “संगणक” भी कहा जाता है। इसके जन्मदाता के रूप में चार्ल्स बैबेज को माना जाता है। सबसे पहला कंप्यूटर, मार्क -1, वर्ष 1937 में बना था।

कम्प्यूटर डाटा संरचना Computer Data Structure

कंप्यूटर एक अत्यंत उपयोगी यंत्र है। यह कंप्यूटर सभी प्रकार के निर्देशों को गणना के लिए संग्रहित करता है, जैसे कि संख्या, नंबर, टेक्स्ट, ग्राफिक्स, चित्र आदि। इसे यूजर द्वारा प्रदत्त सभी डेटा और निर्देशों को बाइनरी भाषा में बदलकर संग्रहित किया जाता है। बाइनरी भाषा एक मशीन की भाषा है जिसमें केवल दो संख्याएं होती हैं – 0 और 1। यूजर द्वारा दिए गए सभी निर्देश बाइनरी भाषा में 0 और 1 में परिवर्तित हो जाते हैं। इस प्रक्रिया को डेटा प्रोसेसिंग कहा जाता है। डेटा प्रोसेसिंग के लिए दो तरीके होते हैं –

  1. एनालॉग क्रियायें
  2. डिजिटल क्रियायें

एनालॉग क्रियायें (Analog Operations)

एनालॉग क्रियाएं निरंतर बदलते संकेतों पर आधारित होती हैं। इनमें संख्याओं का उपयोग नहीं होता। एनालॉग क्रियाएं विज्ञान और इंजीनियरिंग के कई क्षेत्रों में उपयोग की जाती हैं, क्योंकि इन क्षेत्रों में भौतिकीय मापों का उपयोग अधिक किया जाता है, जैसे कि स्पीडोमीटर, ओडोमीटर, वोल्टमीटर, थर्मामीटर आदि।

डिजिटल क्रियायें (Digital Operation)

आधुनिक कंप्यूटर डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक सर्किट (digital electronic circuits) के माध्यम से निर्मित किए जाते हैं। इस सर्किट का मुख्य घटक ट्रांजिस्टर होता है, जो दो स्थितियों, यानी 0 और 1, में कार्य करता है। कंप्यूटर में डाटा को व्यक्त करने वाली इन दो स्थितियों को सम्मिलित रूप से बाइनरी संख्या प्रणाली कहा जाता है।

बाइनरी डाटा को स्टोर करने के लिए एक प्रणाली बनाई गई है, जिसकी सबसे छोटी इकाई बिट है ।

4 बिट्स = 1 निबल

8 बिट्स = 1 बाइट

1024 बाइट्स = 1 किलोबाइट (KB)

1024 किलोबाइट = 1 मेगाबाइट (MB)

1024 मेगाबाइट = 1 गीगाबाइट (GB)

1024 गीगाबाइट = 1 टेराबाइट (TB)

सूचना-प्रौद्योगिकी परिचय Computer Data Structure Introduction

कम्प्यूटर का विकास कई दशकों पहले ही हो चुका है, लेकिन आधुनिक युग में कम्प्यूटर की क्षमता, गति, आकार, और अन्य विशेषताओं में आश्चर्यजनक बदलाव देखने को मिल रहा है। इन सभी विकासों के माध्यम से सूचना प्रौद्योगिकी ने कई असंभव चीजों को संभव बना दिया है। अब हम अपने दूरस्थ दोस्तों और संबंधियों के साथ घर बैठे चैट कर सकते हैं, रेलवे और हवाई यात्राओं की टिकटें आरक्षित कर सकते हैं।

कम्प्यूटर के विकास के साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकी भी विकास के पथ पर अग्रसर है। सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग डाटा संचार, व्यापार, घर, बैंक, आदि स्थानों पर मुख्य रूप से किया जाता है। इसका अर्थ है कि ज्ञान की नई शाखा को सूचना प्रौद्योगिकी कहा जाता है।

सूचना-प्रौद्योगिकी के मौलिक घटक(Fundamental Ingredient of IT)

संचार प्रक्रिया, कम्प्यूटर नेटवर्क, ई-मेल आदि सूचना-प्रौद्योगिकी के मौलिक घटक हैं। इनका संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है-

संचार-प्रक्रिया (Communication Process)

दो विभिन्न या समान डिवाइसों के मध्य डाटा तथा सूचनाओं के आदान प्रदान को डाटा संचार एवं इस सम्पूर्ण प्रक्रिया को संचार-प्रक्रिया कहते हैं। संचार-प्रक्रिया निम्नलिखित माध्यमों के द्वारा सम्पन्न होती है-

  1. संदेश
  2. प्राप्तकर्ता
  3. प्रेषक
  4. माध्यम
  5. प्रोटोकॉल

कम्प्यूटर नेटवर्क (Computer Network)

सूचनाओं या अन्य संसाधनों के संदेशान-स्वागत और साझेदारी के लिए, दो या दो से अधिक कंप्यूटरों के बीच का संचार एवं साझेदारी का नेटवर्क कहलाता है। कंप्यूटर नेटवर्क में संसाधनों और सूचनाओं को एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर तक समान रूप से पहुंचाया जा सकता है। कंप्यूटर नेटवर्क कंपनियों, इमारतों, कक्षाओं, और नगरों के बीच स्थापित किए जाते हैं।

नेटवर्क के प्रकार Types of Network in Hindi

नेटवर्क विभिन्न प्रकार के होते हैं परन्तु मुख्यत: नेटवर्क तीन प्रकार के होते हैं-

1. लोकल एरिया नेटवर्क- लैन (Local Area Network- LAN)

वह नेटवर्क जो केवल एक भवन, कार्यालय अथवा एक कमरे तक सीमित होते हैं, लोकल एरिया नेटवर्क कहलाते हैं। इस नेटवर्क के अंतर्गत कई कम्प्यूटर आपस में संयोजित रहते हैं। परन्तु इनका भौगोलिक क्षेत्र एक या दो किमी. से अधिक नहीं होता है। रिंग, स्टार या कम्प्लीटली कनेक्टेड नेटवर्क आदि लैन के उदाहरण हैं।

2. मैट्रोपोलिटन एरिया नेटवर्क- मैन (Metropolitan Area Network- MAN)

एक या एक से अधिक लोकल एरिया नेटवर्कों को एक साथ जोड़कर बनाए गए नेटवर्क को मैट्रोपोलिटन एरिया नेटवर्क कहते हैं। यह नेटवर्क वृहद स्तरीय नेटवर्क है, जो कई कार्पोरेटों से मिलकर बना होता है। मैन की गति अत्यधिक तीव्र होती है, परन्तु लैन की अपेक्षा धीमी होती है।

3. वाइड एरिया नेटवर्क- वैन (Wide Area Network- WAN)

जो नेटवर्क मंडलीय, राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, और प्रादेशिक स्तर पर जुड़े होते हैं, उन्हें वाइड एरिया नेटवर्क कहा जाता है। इसमें उपग्रह द्वारा कम्प्यूटर टर्मिनलों को आपस में जोड़ा जाता है। उदाहरण के लिए, मुंबई से दिल्ली की तरह कोलकाता के आरक्षण या कनाडा से सिंगापुर की फ्लाइट की आरक्षण केवल वैन के माध्यम से संभव होता है। वैन की गति, लेन, और मार्ग की तुलना में धीमी होती है।

माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस परिचय (Introduction)

माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस, एक संबंधित डेस्कटॉप अनुप्रयोगों और सेवाओं का समूह है जिसे सामूहिक रूप से ऑफिस सूट कहा जाता है। माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस का प्रथम संस्करण माइक्रोसॉफ्ट कॉर्पोरेशन द्वारा 1989 में मैक- OS के लिए लॉन्च किया गया था। सन् 1990 में विंडोज के लिए पहला संस्करण लाया गया। माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस 3.0 विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम का पहला संस्करण था।

उसके बाद कई संस्करण आए, जैसे कि माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस 4.3, माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस 95, माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस 2000, माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस XP, माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस 2003, तथा माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस 2010। माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस में मुख्यत: चार प्रमुख प्रोग्राम शामिल हैं।

  1. माइक्रोसॉफ्ट वर्ड
  2. माइक्रोसॉफ्ट एक्सेल
  3. माइक्रोसॉफ्ट एक्सेस
  4. माइक्रोसॉफ्ट पॉवर प्वाइंट

एमएस ऑफिस के ये प्रोग्राम विभिन्न प्रकार के कार्यों को करने के लिए उपयोग में लाए जाते हैं, हालांकि इन सभी की कार्यप्रणाली लगभग एक है। एक प्रोग्राम पर काम करने के बाद अन्य प्रोग्रामों को सीखना सरल हो जाता है। इसके अतिरिक्त, एमएस ऑफिस के एक प्रोग्राम से दूसरे प्रोग्राम में कोई चित्र, सामग्री, या सूचनाएं लाना या ले जाना अत्यंत सरल है, इसलिए इनसे हर प्रकार के मिश्रित कार्य का भी कम्प्यूटरीकरण किया जा सकता है।

माइक्रोसॉफ्ट वर्ड (Microsoft Word)

माइक्रोसॉफ्ट वर्ड एक वर्ड प्रोसेसर है जो माइक्रोसॉफ्ट कॉर्पोरेशन द्वारा विकसित किया गया है। इसका प्रमुख कार्य दस्तावेज़ों को संचालित करना है। यह एक वर्ड प्रोसेसिंग पैकेज है, जिसकी सहायता से साधारण दैनिक पत्र व्यवहार से लेकर डेस्कटॉप पब्लिशिंग स्तर के कार्य सुविधाजनक रूप से किए जा सकते हैं। इसमें पारंपरिक मेन्युओं के साथ ही टूलबार की सुविधा भी उपलब्ध है, जैसे कॉपी करना, कट करना, जोड़ना, खोजना और बदलना, फॉन्ट, स्पेलिंग और ग्रामर की जाँच करना, बुलेट्स और नंबरिंग इत्यादि। माइक्रोसॉफ्ट वर्ड 2007 और 2010 में दस्तावेजों को विभिन्न भाषाओं में अनुवादित करने की सुविधा भी उपलब्ध है।

कम्प्यूटर वायरस Computer Viruses in Hindi

कंप्यूटर वायरस एक स्वयं आपके कंप्यूटर में प्रवेश करने वाला प्रोग्राम कोड होता है, जो बाहरी स्रोतों द्वारा तैयार किया जाता है। दुनिया का पहला कंप्यूटर वायरस “Elk Cloner” था, जो “इन द वाइल्ड” ने प्रकट किया था। यह कंप्यूटर वायरस एप्पल डॉस 3.3 ऑपरेटिंग सिस्टम में फ्लॉपी डिस्क के जरिए फैलता था। कंप्यूटर वायरस एक प्रोग्राम होता है जो हमारे कंप्यूटर में तबाही लाता है, जो आपकी फाइलों और ऑपरेटिंग सिस्टम में मौजूद सूचनाओं को बिना आपकी जानकारी या चेतावनी के नुकसान पहुंचाता है।

कंप्यूटर वायरस के फैलने का सबसे आसान जरिया नेटवर्क, इंटरनेट और ई-मेल का बढ़ता हुआ उपयोग है। आमतौर पर कंप्यूटर वायरस आपके कंप्यूटर में निम्नलिखित तरीकों से प्रवेश कर सकता है –

  1. संक्रमित प्रोग्राम के उपयोग से
  2. संक्रमित फाइल के उपयोग से
  3. संक्रमित फ्लापी डिस्क के साथ डिस्क ड्राइव में कम्प्यूटर बूट करने से
  4. पाइरेटेड सॉफ्टवेयर के उपयोग से

कम्प्यूटर वायरस अपने आप जेनरेट नहीं होते, बल्कि ये वायरस लोगों द्वारा पूरी सूझ-बूझ से तैयार किए गए प्रोग्राम होते हैं। कुछ लोग इसे अपने कम्प्यूटर की सुरक्षा के लिए प्रयोग करते हैं तो कुछ लोग इसे विध्वंस मचाने के लिए तैयार करते हैं। कम्प्यूटर वायरस के प्रकार वायरस कई प्रकार के होते हैं, परन्तु अधिकांश वायरस को मुख्यत: तीन भागों में बांटा गया है-

  1. बूट सेक्टर
  2. फाइल वायरस
  3. मैक्रो वायरस

महत्वपूर्ण कंप्यूटर प्रोग्रामिंग भाषाएं Computer Programming Languages

कंप्यूटर एक मशीन है और वह हमारी बोलचाल की भाषा को समझ नहीं सकता। इसके लिए प्रोग्राम, विशेष प्रकार की भाषा में लिखे जाते हैं। इन भाषाओं को कंप्यूटर प्रोग्रामिंग भाषा के नाम से जानते हैं। आजकल ऐसी सैकड़ों भाषाएं प्रचलित हैं। ये भाषाएं कंप्यूटर और प्रोग्रामर के बीच संपर्क या फिर संवाद स्थापित करने का काम करती हैं। कंप्यूटर उन्हीं के माध्यम से दिए गए निर्देशों को समझकर काम करता है। कंप्यूटर द्वारा किए जाने वाले अलग-अलग कार्यों के लिए अलग-अलग प्रोग्रामिंग भाषाओं का इस्तेमाल किया जाता है। इनमें कुछ प्रमुख प्रोग्रामिंग भाषाएँ निम्नलिखित हैं –

लो-लेवल लैंग्वेज (Low Level Languages)

वे भाषाएँ जो कंप्यूटर की आंतरिक क्रियाओं को ध्यान में रखकर तैयार की गई हैं, उन्हें “लो-लेवल भाषाएँ” कहा जाता है। इनमें प्रोग्रामर को कंप्यूटर की आंतरिक कार्यप्रणाली की जानकारी होना आवश्यक होती है। इसलिए इसे “निम्न स्तरीय भाषा” कहा जाता है क्योंकि इसमें प्रोग्राम लिखना पूरी तरह से उस कंप्यूटर पर निर्भर करता है जिस पर यह लिखा जा रहा है। इस भाषा को पुनः दूसरी भाषाओं में अनुवाद किया जा सकता है।

1. मशीन लैंग्वेज (Machine Languages)

कम्प्यूटर एक मशीन है जो केवल विद्युत संकेतों को ही समझ सकती है। इन विद्युत संकेतों को ‘ऑन’ या 1 (एक) और ‘ऑफ’ या 0 (शून्य) द्वारा प्रकट किया जाता है। इन अंकों को बाइनरी अंक कहा जाता है। कम्प्यूटर केवल इन बाइनरी अंकों में दिए गए निर्देशों को समझ सकता है। इन बाइनरी अंकों से बनी भाषा को हम मशीन भाषा कहते हैं। उदाहरण के लिए – 0100100011100110011.

2. असेंबली लैंग्वेज (Assembly Languages)

असेम्बली लैंग्वेज वह भाषा है जो पूरी तरह से मशीन भाषा पर आधारित है। इनमें 0 और 1 की जगह अंग्रेजी के कुछ अक्षरों और चुने हुए शब्दों का कोड के रूप में उपयोग किया जाता है। इन कोडों को नेमोनिक कोड या शाब्दिक कोड के रूप में जाना जाता है।

3. हाई लेवल लैंग्वेज (High Level Languages)

जैसा कि लो-लेवल भाषा के लिए बताया गया है कि प्रोग्राम लिखने के लिए कम्प्यूटर की आंतरिक कार्यप्रणाली का ज्ञान जरूरी है। दूसरा, प्रत्येक कम्प्यूटर की अपनी विशेष मशीनी भाषा और असेम्बली भाषा होती है। इसलिए, एक प्रकार के कम्प्यूटर के लिए इन भाषाओं में लिखा गया प्रोग्राम दूसरे प्रकार के कम्प्यूटरों के लिए अस्वीकार्य होता है। इसलिए, ऐसी प्रोग्रामिंग भाषाओं का विकास किया गया है जो सिस्टम की आंतरिक कार्यप्रणाली पर आधारित नहीं होती और जिनमें लिखे गए प्रोग्रामों को किसी भी प्रकार के सिस्टम पर चलाना संभव हो।

इन भाषाओं को हाई-लेवल भाषा कहा जाता है। हाई-लेवल प्रोग्रामिंग भाषा में इंग्लिश के चुने हुए शब्दों और साधारण गणित में प्रयोग किए जाने वाले चिह्नों का प्रयोग किया जाता है। इन भाषाओं में प्रोग्राम लिखना उनमें गलतियों का पता लगाना और उन्हें सुधारना लो-लेवल भाषा की तुलना में आसान होता है। सभी प्रोग्राम हाई-लेवल भाषा में ही लिखे जाते हैं।

हाई लेवल प्रोग्रामिंग भाषाओं को भी उनकी प्रकृति के अनुसार दो श्रेणियों में बांटा जा सकता है।

  1. विधि अभिमुखी भाषाएं (Procedure Oriented Languages)
  2. समस्या अभिमुखी भाषाएं (Problem Oriented Languages)

प्रमुख हाई लेवल लैंग्वेज:

  • बेसिक
  • फोरट्रॉन
  • लोगो
  • कोबोल
  • पास्कल
  • सी
  • सी++
  • अल्गोल
  • कोमाल
  • पायलट
  • स्नोबॉल
  • प्रोलॉग
  • फोर्थ जेनरेशन लैग्वेज (4जीएल)

इंटरनेट परिचय Internet Introduction in Hindi

इंटरनेट से तात्पर्य एक ऐसे नेटवर्क से है जो दुनिया भर के लाखों करोड़ों कम्प्यूटरों से जुड़ा है। इसका मतलब है कि किसी नेटवर्क का कोई सिस्टम किसी अन्य नेटवर्क के सिस्टम से जुड़कर कम्यूनिकेट कर सकता है, अर्थात सूचनाओं का आदान-प्रदान कर सकता है। इस सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए एक निर्दिष्ट नियम का प्रयोग किया जाता है, जिसे ट्रांसमिशन कंट्रोल प्रोटोकॉल या इंटरनेट प्रोटोकॉल (TCP/IP) कहा जाता है।

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इंटरनेट की सेवाएं

इसकी सेवाओं में कुछ का जिक्र यहां किया जा रहा है-

फाइल ट्रांसफर प्रोटोकॉल (एफ टी पी)- फाइल ट्रांसफर प्रोटोकॉल का उपयोग एक कम्प्यूटर नेटवर्क से किसी दूसरे कम्प्यूटर नेटवर्क में फाइलों को ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है।

इलेक्ट्रॉनिक मेल ई-मेल- इसको संक्षिप्त रूप से ई-मेल कहा जाता है। इस माध्यम के द्वारा बड़ी से बड़ी सूचनाओं व संदेशों को इलेक्ट्रॅनिक प्रणाली द्वारा प्रकश की गति से भेजा या प्राप्त किया जा सकता है। इसके द्वारा पत्र, ग्रीटिंग या सिस्टम प्रोग्राम को दुनिया के किसी भी हिस्से में भेज सकते हं।

गो-फोर- यह एक यूजर फ्रैंडली इंटरफेज है। जिसके जरिए यूजर, इंटरनेट पर प्रोग्राम व सूचनाओं का आदान प्रदान किया जा सकता है। गोफर के द्वारा इंटरनेट की कई सेवाएं आपस में जुड़ी होती है।

वल्र्ड वाइड वेब (www)- इसके द्वारा यूजर अपने या अपनी संस्था आदि से सम्बंधित सूचनाएं दुनिया में कभी भी भेज सकता है, और अन्य यूजर उससे सम्बंधित जानकारियां भी प्राप्त कर सकता है।

टेलनेट- डाटा के हस्तांतरण के लिए टेलनेट का प्रयोग किया जाता है। इसके द्वारा यूजर को रिमोट कम्प्यूटर से जोड़ा जाता है। इसके बाद यूजर अपने डाटा का हस्तांतरण कर सकता है। टेलनेट पर कार्य करने के लिए यूजर नेम व पास वर्ड की जरूरत होती है।

यूजनेट- अनेक प्रकार की सूचनाओं को एकत्र करने के लिए इंटरनेट के नेटवर्क, यूजनेट का प्रयोग किया जाता है। इसके माध्यम से कोई भी यूजर विभिन्न समूहों से अपने लिए जरूरी सूचनाएं एकत्र कर सकता है।

वेरोनिका- वेरोनिका प्रोटोकॉल गोफर के माध्यम से काम करता है। यूजर, गोफर व वेरोनिका का प्रयोग एक साथ करके किसी भी डाटा बेस पर आसानी से पहुंच सकता है। इनके प्रयोग से जरूरी सूचनाएं तेजी से प्राप्त की जा सकती हैं।

आर्ची- फाइल ट्रांसफर प्रोटोकॉल (एफटीपी) में स्टोर फाइलों को खोजने के लिए आर्ची का प्रयोग किया जाता है।

इंटरनेट – शब्दावली Internet – Glossary in Hindi

प्रोटोकॉल- यह एक ऐसी मानक औपचारिक प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से कम्प्यूटर नेटवर्क में अंकीय संचार किया जाता है।

ब्राउजर- यह एक ऐसा सॉफ्टवेयर है, जिसकी मदद से यूजर सूचनाओं को प्राप्त करने के लिए इंटरनेट में प्रवेश करता है।

वेब सर्वर- यह प्रोग्राम वेब ब्राउजर के द्वारा संसाधनों को प्राप्त करने के लिए यूजर द्वारा दिए गए अनुरोध को पूरा करता है।

नेटवर्क- कई सिस्टमों को एक साथ जोड़कर बनाए गए संजाल को नेटवर्क क हते हैं। इसके द्वारा एक साथ कई जगहों पर सूचनाओं का आदान-प्रदान करना संभव है।

आन-लाइन- जब यूजर इंटरनेट पर जान-करियों व सेवाओं का अध्ययन करता है। तब कहा जाता है कि यूजर ऑन लाइन है।

होम पेज- यह किसी भी साइट का शुरूआती प्रदर्शित पेज है। जिसमें सूचनाएं हाईपरलिंक द्वारा जोड़ी जाती है।

ऑफ लाइन- इसमें यूजर इंटरनेट में मौजूद सूचनाओं को अपने अपने सिस्टम में संग्रहित कर इंटरनेट संपर्क काट देता है।

हाइपर टेक्स्ट मार्कअप लैग्वेंज (एचटीएमएल)- इसका प्रयोग वेब पेज बनाने में किया जाता है। शुरूआत में इसका प्रयोग वेब पेज डिजाइन करने में किया जाता था।

हाइपर टेक्स्ट ट्रॉसंफर प्रोटोकॉल- इसका प्रयोग एचटीएमएल में संगृहित दस्तावेजों व दूसरे वेब संसाधनों कों स्थानांतरित करने में किया जाता है।

टीसीपी/आईपी- इसका प्रयोग सूचनाओं के आदान-प्रदान में किया जाता है।

यूनिफॉर्म रिसोर्स लोकेटर(यूआरएल)- इसका प्रयोग वेब पर किसी विशेष सूचना को संचालित करने में किया जाता है।

वेब पेज- होम पेज पर बने हाइपर लिंक पर क्लिक करने पर जो पेज हमारे सामने प्रस्तुत होता है, उसे वेब पेज कहते हैं।

वेबसाइट- वेब पेजों के समूहों को वेबसाइट कहते हैं। जिसमें आडियो, वीडियों, इमेजेस का समावेश होता है।

हाइपर लिंक- वेब पेज में मौजूद वे विशेष शब्द या चित्र जिस पर क्लिक करने पर उस शब्द या चित्र से सम्बंधित एक अलग वेब पेज पर आ जाती है। उसे वेब पेज को हाइपर लिंक कहते है।

डाउनलोड- इंटरनेट या किसी अन्य कंम्प्यूटर से प्राप्त सूचनाओं को अपने कम्प्यूटर में एकत्रित करना डाउनलोड कहलाता है।

अपलोड- अपने कम्प्यूटर से किसी अन्य कम्प्यूटर में सूचनाएं भेजना अपलोड कहलाता है। जैसे ई-मेल भेजना।

सर्वर- वह कम्प्यूटर जो इंटरनेट प्रयोग करने वाले सिस्टम को सूचनाएं प्रदान करने की क्षमताएं रखता है, सर्वर कहलाता है।

सर्फिंग- इंटरनेट के नेटवर्कों में अहम सूनचाओं को खोजने का काम सर्फिंग कहलाता है।

इंटरनेट एड्रेस- इंटरनेट में प्रयुक्त एड्रेस के मूलभूत हिस्से को डोमेन कहा जाता है। इंटरनेट से जुड़े हर कम्प्यूटर का एक अलग डोमेन होता है। जिसे डोमेन नेम सिस्टम कहते हैं। जिसे 3 भागों में बांटा जा सकता है।

  1. जेनेरिक डोमेन
  2. कंट्री डोमेन
  3. इनवर्स डोमेन

Abacus: Abacus गणना करने के लिए प्रयोग में लाया जाने वाला अति प्राचीन यंत्र जिससे अंकों को जोड़ा व घटाया दोनों जाता है।

Accessory: यह प्रोसेसिंग के लिए एक आवश्यक संसाधन होते हैं जिन्हें सहायक यन्त्र भी कहा जाता है। जैसे- वेब कैमरा, फ्लापी डिस्क, स्कैनर, पेन ड्राइव आदि

Access Control: सूचना और संसाधनों की की सुरक्षा के लिए प्रयुक्त की गई विधि जिसके द्वारा अनाधिकृत यूजर को सूचना और निर्देशों को पहुंचने से रोकता है।

Access Time: यूजर द्वारा मेमोरी से डाटा प्राप्त करने के लिए दिए गए निर्देश और डाटा प्राप्त होने तक के बीच के समय को Access time कहते हैं।

Accumulator: एक प्रकार का रजिस्टर जो प्रोसेसिंग के दौरान डाटा और निर्देशों को संग्रहीत करता है।

Active Device: वह उपकरण है जिसमें कोई कार्य वैद्युत् प्रवाह द्वारा सम्पादित किया जाता है।

Active Cell: MS Excel में प्रयोग होने वाला वह खाना है, जिसमें यूजर डाटा लिखता है।

Active Window: कम्प्यूटर में उपस्थित वह विंडो, जो यूजर द्वारा वर्तमान समय में सक्रिय है।

Adapter: दो या दो से अधिक उपकरणों या संसाधनों के बीच सामंजस्य बनाने के लिए प्रयुक्त की जाने वाली युक्ति।

Adder: एक प्रकार का इलेक्ट्रॉनिक सर्किट, जिसके द्वारा दो या दो से अधिक संख्याओं को जोड़ा जा सकता है।

Address: वह पहचान चिन्ह जिसके द्वारा डाटा की स्थिति का पता चलता है।

Algorithm: कम्प्यूटर को दिया जाने वाला अनुदेशों का वह क्रम जिसके द्वारा किसी कार्य को पूरा किया जाता है।

Alignment: डाटा में पैराग्राफ को व्यवस्थित करने की प्रक्रिया।

Alphanumeric: (A-Z) तक के अक्षरों और (0-9) अंकों के समूह को alphanumeric कहते हैं।

Analog: भौतिक राशि की वह मात्रा जो लगातार तरंगीय रूप में परिवर्तित होती है।

Analog Computer: जिस कम्प्यूटर में डाटा भौतिकीय रूप से प्रयुक्त किया जाता है।

Antivirus: कम्प्यूटर का दोषपूर्ण प्रोग्राम से होने वाली क्षति को बचाने वाला प्रोग्राम।

Application Software: किसी विशेष कार्य के लिए बनाए गए एक या एक से अधिक प्रोग्रामों का समूह।

Artificial Intelligence: मानव की तरह सोचने, समझने और तर्क करने की क्षमता के विकास को कम्प्यूटर में Artificial Intelligence कहते हैं।

ASCII (American Standard Code For Information Interchange): वह कोड जिसके द्वारा अक्षरों तथा संख्याओं को 8 बिट के रूप में प्रदर्शित किया जाता है।

Assembler: वह प्रोग्राम जो असेम्बली भाषा को मशीनी भाषा में परिवर्तित करता है।

Assembly Language: एक प्रकार की कम्प्यूटर भाषा जिसमें अक्षरों और अंकों को छोटे-छोटे कोड में लिखा जाता है।

Asynchronous: डाटा भेजने की एक पद्घति, जिसमें डाटा को नियमित अन्तराल में अपनी सुविधानुसार भेजा जा सकता है।

Authentication: वह पद्घति, जिसके द्वारा कम्प्यूटर के वैद्यता की पहचान की जाती है।

Auto Cad: एक सॉफ्टवेयर जो रेखा चित्र और ग्राफ स्वत: तैयार करता है।

Audio-Visual: ऐसी सूचना और निर्देश, जिन्हें हम देख सुन सकते हैं पर प्रिंट नहीं निकाल सकते।

Automation: किसी डाटा या सूचना का स्वत: ही प्रोसेस होना।

BASIC: यह एक उच्चस्तरीय, अत्यन्त उपयोगी व सरल भाषा है, जिसका प्रयोग सभी कम्प्यूटरों में होता है।

Binary: गणना करने के लिए प्रयोग की जाने वाली संख्या प्रणाली।

Bit: बाइनरी अंक (0-1) को संयुक्त रूप से बिट कहा जाता है, यह कम्प्यूटर की सबसे छोटी इकाई है।

Bite: 8 बिटों को सम्मिलित रूप से बाइट कहा जाता है। एक किलोबाइट में 1024 बाइट होती हैं।

Biochop: जैव प्रौद्योगिकी पर आधारित व सिलिकॉन से बनी इस चिप से ही कम्प्यूटर का विकास हो पाया है।

Backbone: कम्प्यूटर नेटवर्क में अन्य कम्प्यूटरों को आपस में जोडऩे वाली मुख्य लाइन।

Background Processing: निम्न प्राथमिकता वाले प्रोग्राम को उच्च प्राथमिकता वाले प्रोग्राम में बदलने की क्रिया।

Back Up: सामान्यत: Back Up कोई भी प्रोग्राम हो सकता है, जिसके द्वारा कम्प्यूटर को खराब होने से बचाया जा सकता है।

Bad Sector: स्टोरेज डिवाइस में वह स्थान जहां पर डाटा लिखा या पढ़ा नहीं जा सकता।

Band Width: डाटा संचरण में प्रयोग की जाने वाली आवृत्ति की उच्चतम और निम्नतम सीमा का अन्तर Band Width कहलाता है।

Base: संख्या पद्वति में अंकों को व्यक्त करने वाले चिन्हों को कहा जाता है।

Batch File: Dos ऑपरेटिंग सिस्टम में प्रोग्राम की वह फाइल जो स्वंय संपादित होती है।

Band: वह इकाई जो डाटा संचारण की गति को मापता है।

1 Band= 1 Bite/sec

Blinking: किसी बिंदु पर कर्सर की स्थिति को Blinking कहते हैं।

Biometric Device: वह डिवाइस जो दो व्यक्तियों के भौतिक गुणों में अंतर कर सकने में सक्षम हो।

Bernoulli Disk: वह चुम्बकीय डिस्क जो रीड व राइट दोनों में ही सक्षम है, डाटा भण्डारण के लिए प्रयोग की जाती है।

Broad Band: कम्प्यूटर नेटवर्क जिसके संचरण की गति 1 मिलियन बिट्स प्रति सेकेण्ड या इससे अधिक होती है।

Browse: जब इंटरनेट पर किसी वेबसाइट को खोजा जाता है तो उस प्रक्रिया को कहते हैं।

Browser: वह साफ्टवेयर जिसके माध्यम से हम इंटरनेट पर अपनी पसंद की वेबसाइट को खोज कर सूचना प्राप्त करते हैं।

Bridge Ware: यह सॉफ्टवेयर हैं जिसके द्वारा कम्प्यूटरों के मध्य सामंजस्य स्थापित किया जाता है।

Bubble Memory: जिसमें डाटा को स्टोर करने के लिए चुम्बकीय माध्यमों का प्रयोग किया जाता है।

Buffer: एक प्रकार की डाटा स्टोरेज डिवाइस है, जो कम्प्यूटर के विभिन्न प्रकार के उपकरणों के बीच डाटा- स्थानन्तरण की गति को एक समान बनाता है।

Burning: वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा कंप्यूटर में डाटा लिखा जाता है।

Bus: एक प्रकार का मार्ग है जो डाटा या इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले कर जाता है।

Blue Tooth: एक लघु रेडियो ट्रांसमीटर होता है जिसके द्वारा सूचनाओं का आदान- प्रदान किया जाता है।

Boot: ऑपरेटिंग सिस्टम द्वारा किया जाने वाला सबसे प्रारम्भिक कार्य Boot कहलाता है।

Bug: यह एक प्रकार का दोष या त्रुटि होता है, जो कम्प्यूटर में उपस्थित प्रोग्रामों में पाया जाता है। Bug को हटाने की प्रक्रिया को Debugging कहा जाता है।

Chip: Chip सामान्यत: सिलिकॉन अथवा अन्य अद्र्घचालकों से बना छोटा टुकड़ा होता है, जिस पर विभिन्न प्रकार के कार्यों को पूरा करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक सर्किट बने होते हैं।

Computer Program: किसी कार्य को विधिवत तरीके से पूर्ण करने के लिए कई प्रकार के प्रोग्राम बनाये जाते हैं, जिन्हें Computer Program कहा जाता हैं। सामान्यत:

Computer Program विभिन्न प्रकार की सूचनाओं का समूह होता है।

Cyber Space: Cyber Space द्वारा कम्प्यूटर नेटवर्क में उपस्थित सूचनाओं का आदान-प्रदान पूरे विश्व में किया जाता है।

CD-R/W: इसे विस्तृत रूप से Compact Disk – Read/Write कहा जाता है। यह एक Storage Device है। जिसमें डाटा को बार-बार लिखा तथा पढ़ा जा सकता है।

CD-R: इसे विस्तृत रूप से Compact Disk – Recordable कहा जाता है। इस Storage Device में डाटा केवल पढ़ा जा सकता हैं। लेकिन Store डाटा में कोई भी परिवर्तन नहीं किया जा सकता है।

CD ROM Juke Box: इसे विस्तृत रूप से Compact Disk Read Only Memory Juke Box कहते है। इस Storage Device में अनेक प्रकार की सीडियां, ड्राइव्स, डिस्कस आदि सम्मिलित होती है।

Cell: Row और Column से निर्मित भाग को Cell कहा जाता है।

CPU: इसका विस्तृत रूप Central Processing Unit Processing हैं। यह कम्प्यूटर में होने वाली सभी क्रियाओं की प्रोसेसिंग करता है। यह कम्प्यूटर का दिमाग कहलाता है।

Character Printer: इसकी विशेषता यह है कि यह एक बार में केवल एक ही कैरेक्टर (जैसे-अंक, अक्षर अथवा कोई भी चिन्ह) प्रिन्ट करता हैं।

Chat: इंटरनेट के द्वारा दूर स्थिर अपने मित्र या सगे-सम्बंधियों से वार्तालाप करना, Chat कहलाता हैं।

Channel Map: वह प्रोग्राम, जो अक्षरों, अंकों के समूह को दर्शाता है, Channel Map कहलाता है।

Check Box: वह प्रोग्राम, जिसके द्वारा किसी कार्य को सक्रिय या निष्क्रिय किया जाता हैं। ये प्रोग्राम विण्डोज के GUI (ग्राफिकल यूजर इंटरफेस) में प्रयुक्त किये जाते हैं।

Cladding: Cladding एक अवरोधक सतह होती है। जोकि प्रकाशीय तन्तु के ऊपर लगायी जाती है।

Click: माउस के बटन को दबाना क्लिक” करना कहलाता हैं।

Client Computer: वह कम्प्यूटर, जो नेटवर्क में सर्वर को सेवा प्रदान करता हैं, Client Computer कहलाता है।

Clip Art: कम्प्यूटर में उपस्थित रेखा चित्र का समूह Clip Art कहलाता है।

Component: यूटलिटी सॉफ्टवेयर के अन्र्तगत प्रयुक्त होने वाले पुर्जे Component कहलाते हैं।

Compile: उच्च स्तरीय तथा निम्न स्तरीय भाषाओं को मशीनी भाषा में बदलना Compile करना कहलाता है।

Compiler: Compiler उच्च स्तरीय भाषा को मशीनी भाषा में बदलने के लिए प्रयुक्त किया जाता है।

Compatible: विभिन्न प्रकार के कम्प्यूटरों को एक-साथ जोड़कर उनमें सामंजस्य बैठाना।

Communication Protocol: कार्य को सरल तथा सुविधाजनक बनाने के लिए कई प्रकार के नियम बनाये जाते हैं, जिन्हें कम्प्यूटर भाषा में Communication Protocol कहते हैं।

Common Carriers: एक संस्था, जो डाटा संचरण की सुविधा प्रदान करती है।

Command: कम्प्यूटर में किसी कार्य को पूरा करने के लिए जब कोई निर्देश दिया जाता है, तो उसे Command देना कहते हैं।

Cold Fault: कम्प्यूटर पर काम करते-करते अचानक दोष उत्पन्न हो जाना, परन्तु कम्प्यूटर को दोबारा ऑन करने पर दोष का दूर हो जाना Cold Fault कहलाता हैं।

Cold Boot: दिए गए नियमों द्वारा कार्य सम्पन्न करने की विधि Cold Boot कहलाती है

Coding: प्रोग्रामिंग भाषा में अनुदेशों को लिखने की क्रिया Coding कहलाती है।

Co-axial Cable: एक विशेष तार, जिसे डाटा संचरण के लिए प्रयुक्त किया जाता है। Co-axial Cable में एक केन्द्रीय तार तथा उसके चारों ओर तारों की जाली होती है।

Clock: मदरबोर्ड पर स्थित डिजिटल संकेतों को उत्पन्न करने वाली घड़ी।

Clip Board: Clip Board कम्प्यूटर की मेमोरी में आरक्षित वह स्थान होता हैं, जहां किसी भी कार्य को सम्पन्न करने के लिए निर्देश दिए होते हैं।

Composite Video: इसके द्वारा रंगीन आउटपुट प्राप्त होता है।

Computer: गणना करने वाला एक यन्त्र, जो ह्यद्गह्म् द्वारा प्राप्त निर्देशों की प्रोसेसिंग करके उसका उपयुक्त परिणाम आउटपुट डिवाइस के द्वारा प्रदर्शित करता है।

Computer Aided Desin (CAD): वह सॉफ्टवेयर, जिसका प्रयोग डिजाइन बनाने अथवा डिजाइनिंग करने के लिए किया जाता है।

Computer Aided Manufacturing (CAM): वह सॉफ्टवेयर, जिसका प्रयोग प्रबन्धक, नियन्त्रक आदि के कार्यों के लिए किया जाता है।

Computer Jargon: Computer Jargon के द्वारा हम किसी भी क्षेत्र तथा भाषा में प्रयुक्त शब्दों की शब्दावली प्राप्त कर सकते हैं।

Computer Literacy: कम्प्यूटर में होने वाले कार्य तथा उन्हें करने का ज्ञान होना Computer Literacy कहलाता है।

Computer Network: दो या दो से अधिक कम्प्यूटरों को एक साथ जोड़कर बनाये जाने वाले यन्त्र को Computer Network कहते हैं।

Computer System: उपकरणों का समूह (जैसे – मॉनीटर, माउस, की-बोर्ड आदि) Computer System कहलाता है।

Console: Console एक प्रकार का टर्मिनल हैं, जो मुख्य कम्प्यूटर से जुड़ा होता है तथा कम्प्यूटर में होने वाले कार्यों पर नियन्त्रण रखता है।

Control Panel: Control Panel एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है, जिसके ऊपर बहुत-से बटन लगे होते हैं। इसके द्वारा कार्य का दिशा- निर्देशन होता है।

Cylinder: Cylinder दो या दो से अधिक ट्रैकों का समूह होता है।

Cut: मॉनीटर पर उपस्थित डाटा को डिलीट करने करने के प्रयुक्त कमांड।

Cursor Control Key: यह की-बोर्ड में Cursor को नियंत्रित करने के लिए प्रयुक्त Key है। माउस खराब हो जाने पर इस Key का प्रयोग मुख्य रूप से किया जाता है।

Cryptography: किसी डाटा तथा निर्देशों को Password के द्वारा संरक्षित कर देने तथा आवश्यकता पडऩे पर पुन: Save किये गये डाटा तथा निर्देश को प्राप्त करने की प्रक्रिया को Cryptographyकहा जाता है।

Corel Draw: डिजाइन तैयार करने के लिए प्रयोग किये जाने वाले सॉफ्टवेयर को Corel Draw कहा जाता हैं। इसका प्रयोग मुख्यत: DTP (डेस्कटॉप पब्लिशिंग) के लिये किया जाता है।

CD-ROM: यह भण्डारण युक्ति है, जो कि प्लास्टिक की बनी होती है तथा इसमें डाटा लेजर बीम की सहायता से स्टोर किया जाता है। इसकी भण्डारण क्षमता 700 MB (80 मिनट) होती है।

Cursor: टेक्स्ट लिखते समय कम्प्यूटर स्क्रीन पर “Blink” करने वाली खड़ी रेखा को Cursor कहते है।

Computer General Knowledge in Hindi

1. कम्प्यूटर में प्रयुक्त होने वाला आईसी चिप सिलिकॉन का बना होता है

2. भारत का सिलिकॉन वैली बंगलौर स्थिति है

3. कम्प्यूटर विज्ञान मे पीएचडी करने वाले प्रथम भारतीय डॉ राज रेड्डी है

4. विश्व का सबसे बड़ा कम्प्यूटर नेटवर्क इंटरनेट है

5. कम्प्यूटर मे प्रोग्राम की सूची को मेन्यू (Menu) कहा जाता है ?

6. रेलवे मे प्रथम कम्प्यूटर रिजर्वेशन पद्धति नई दिल्ली में लागू की गई थी

7. गणना संयन्त्र एबाकस (Abacus) का आविष्कार किस चीन में हुआ था

8. विश्व की प्रथम महिला कम्प्यूटर प्रोग्रामर होने का श्रय एडा ऑगस्टा, (अमेरिका) किसे जाता है

9. विश्व में सर्वाधिक कम्प्यूटरों वाला देश अ‍मेरिका

10. द हिन्दु और इंडिया टुडे प्रथम भारतीय पत्र/पत्रिकाएं है जो इंटरनेट पर उपलब्ध हुई

11. मासायोशी सन को इंटरनेट का सम्राट कहा जाता है ?

12. “मंत्र ऑन लाईन “ देश की पहली अन्तर्राष्ट्रीय इंटरनेट सेवा उपलब्ध कराने वाली कम्पनी है

13. इंटरनेट पर जनगणना करने वाला विश्व का पहला देश सिंगापुर है

14. विश्व में सबसे कम उम्र के वेब डिजाइनर होने का गौरव अजय पुरी ने प्राप्त किया ?

15. क्रे-1 (Cray-1) विश्व का प्रथम सुपर कम्प्यूटर है।

16. परम सुपर कम्प्यूटर का विकास पुणे स्थित सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस कम्प्यूटिंग (सी-डेक) के द्वारा किया गया है

17. कम्प्यूटर में किसी शब्द की लम्बाई बिट्स मे नापी जाती है

18. इंटरनेट के आविष्कारक डॉ विंट सर्फ माने जाते है

19. भारत में इंटरनेट उपभोक्ताओं की सर्वाधिक संख्या महाराष्ट्र राज्य में है

20. डॉ. डगलस इंजेलबार्ट (Dr.Douglas Engelbart) ने 1964 माउस का आविष्कार किया। जो कि लकड़ी का बना था।

21. प्रथम वेब साइट के निर्माण का श्रेय टिम बर्नस ली (Tim Berners Lee) को है। इन्हें World Wide Web का संस्थापक कहा जाता है।

22. बिल गेट्‌स (Bill Gates) तथा पाल एलेन (Paul Allen) ने मिलकर 1975 में माइक्रोसाफ्ट कॉरपोरेशन की स्थापना की।

23. बिलगेट्‌स की प्रसिद्ध पुस्तक ‘The Road Ahead’ 1995 में लिखी गई। वर्तमान में वे “Bill and Melinda Gates Foundation” द्वारा सामाजिक कार्यों में लगे है।

24. भारत के सबीर भाटिया (Sabeer Bhatia) ने फ्री ईमेल सेवा हॉटमेल (Hotmail) को जन्म दिया।

25. ब्लू टूथ एक बेतार तकनीक (Wireless Technology) है जिसके द्वारा मोबाइल फोन के जरिये कम दूरी में कम्प्यूटर और विभिन्न उपकरणों को जोड़ा जाता है।

26. बैंकों में एटीएम (Automatic Teller Machine) वैन (WAN) का एक उदाहरण है।

27. Wi-Fi का अर्थ है Wireless Fidelity इसका प्रयोग बेतार तकनीक द्वारा कम्प्यूटर के दो उपकरणों के बीच संबंध स्थापित करने के लिए किया जाता है।

28. WAP (Wireless Access Point) एक युक्ति है जो विभिन्न संचारमाध्यमों को जोड़कर एक बेतार नेटवर्क बनाता है।

29. कम्प्यूटर के Standby Mode में मॉनीटर तथा हार्ड डिस्क ऑफ हो जाता है ताकि कम उर्जा खपत हो। किसी भी बटन को दबाने या माउस क्लिक करने से कम्प्यूटर Standby Mode से बाहर आ जाता है।

30. IBM का पूरा नाम International Business Machine है

31. Hyper Text एक डाक्यूमेंट है जो उस वेब पेज को दूसरे डाक्यूमेंट केसाथ जोड़ता है।

32. Blog शब्द Weblog से बना है। Blog किसी व्यक्ति द्वारा निर्मित वेब साइट है जहां वह अपने विचार, अनुभव या जानकारी रख सकता है। इस वेब साइट को पढ़ने वाले अन्य व्यक्ति भी इस विषय पर अपनी टिप्पणी दे सकते हैं।

33. Beta Release किसी साफ्टवेयर या तकनीक की उपयोगिता को परखने के लिए निर्माण के दौरान उसे बाजार में जारी करने को कहा जाता है।

34. पॉप अप (Pop-up) वेब ब्राउजिंगके दौरान स्वयं खुलने वाला विज्ञापनका विण्डो है।

35. की-बोर्ड की संरचना के निर्माण का श्रेय क्रिस्टोफर लॉथम सोल्स (Christopher Latham Sholes) को जाता है।

36. डिजिटल काम्पैक्ट डिस्क (DCD) का आविष्कार 1965 में जेम्स रसेल (James Russell) ने किया।

37. बॉब नोयी (Bob Noyee) तथा गार्डन मूरे (Gordon Moore) ने सम्मिलित रूप से इंटेल (Intel) नामक कम्पनी की स्थापना की।

37. मोटरोला (Motorola) के डॉ. मार्टिन कूपन (Dr. Martin Cooper) ने मोबाइल फोन का आविष्कार किया।

38. जीएसएम (GSM-Global System For Mobile Communication) मोबाइल फोन के लिए प्रयुक्त एक लोकप्रिय मानक है।

39. सीडीएमए (CDMA-Code Division Multiple Access) मोबाइल नेटवर्क स्थापित करने की व्यवस्था है।

40. कलकुलेटर तथा कम्प्यूटर में अंतर यह है कि कम्प्यूटर को एक साथ कई निर्देश या निर्देशों का समूह दिया जा सकता है तथा यह एक साथ कई कार्य कर सकता है। इसके विपरीत कलकुलेटर को एक साथ एक ही निर्देश दिया जा सकता है।

41. प्रथम व्यावसायिक इंटीग्रेटेड चिप (IC) का निर्माण फेयर चाइल्ड सेमीकण्डक्टर कॉरपोरेशन (Fair Child Semiconductor Corporation) ने 1961 में किया।

42. मॉनीटर का आकार मॉनीटर के विकर्ण (Diagonal) की लम्बाई में मापा जाता है।

43. फ्लापी डिस्क का आविष्कार IBM के वैज्ञानिक एलान शुगार्ट (Alan Shugart) ने 1971 में किया।

44. मानव मस्तिष्क और कम्प्यूटर में सबसे बड़ा अंतर यह है कि कम्प्यूटर की स्वयं की सोचने की क्षमता नहीं होती।

45.HTTP का पूरा नाम Hyper Text Transfer Protocol है

46.कम्प्यूटर प्लेटफार्म का तात्पर्य कम्प्यूटर में प्रयुक्त आपरेटिंग सिस्टम से है जो अन्य प्रोग्रामों के क्रियान्वयन के लिए आधार तैयार करता है। एक प्लेटफार्म में चलने 00वाले प्रोग्राम सामान्यत: दूसरे प्लेटफार्म में नहीं चलते हैं।

47. अमेरिका के विंटेन कर्फ (Vinten Cerf) को इंटरनेट का जन्मदाता (Father of the Internet) कहा जाता है।

48. नेटीकेट (Netiquette-Net + etiquette) इंटरनेट प्रयोग के समय किये जाने वाले अपेक्षितव्यवहारों और नियमों का समूह है।

49. इंटरनेट का संचालन किसी संस्था या सरकार या प्रशासन के नियंत्रण से मुक्त है।

50. जीपीआरएस (GPRS-General Pocket Radio Service) वायरलेस द्वारा मोबाइलफोन से इंटरनेट सुविधा के प्रयोग की तकनीक है।

51. हाइपर टेक्स्ट (Hyper Text) एक व्यवस्था है जिसके तहत टेक्स्ट, रेखाचित्र व प्रोग्राम आदि को आपस में लिंक किया जा सकता है। इसका विकास टेड नेल्सन (Ted Nelson) ने 1960 में किया।

52. WAP-Wireless Application Protocol मोबाइल फोन द्वारा इंटरनेट के इस्तेमाल के दौरान प्रयोग किये जाने वाले नियमों का समूह है।

53. इंटरनेट फोन कम्प्यूटर और इंटरनेट का प्रयोग कर टेलीफोन कॉल स्थापित करने की प्रक्रिया है।

54. इंटरनेट तथा कम्प्यूटर का प्रयोग कर किये गये अवैध कार्य, जैसे-सुरक्षितफाइलों को देखना और नष्ट करना, वेब पेज में परिवर्तन करना, क्रेडिट कार्ड का गलत इस्तेमाल करना, वायरस जारी करना आदि साइबर (Cyber Crime) कहलाता है।

55. इकॉन (ICANN-Internet Corporation for Assigned Names and Numbers) इंटरनेट पर प्रत्येक कम्प्यूटर के लिए एक विशेष पता देने के उद्देश्य से 1998 में गठित एक अन्तर्राष्ट्रीय संगठन है।

56. इमोटीकॉन (Emoticon-emotion + icon) एक या अधिक संकेतों का समुच्चय है जिसके द्वारा इंटरनेट पर किसी विशेष भावना को व्यक्त किया जाता है।

57. एक्स्टानेट (Extranet) एक व्यक्तिगत नेटवर्क है जो व्यवसाय के लिए इंटरनेट तकनीक और सार्वजनिक संचार व्यवस्था का प्रयोग करता है।

57. हैकर (Hacker) एकव्यक्ति है जो इंटरनेट पर इलेक्टानिक सुरक्षा व्यवस्था को भेदकर मनोरंजनया उत्सुकतावशगुप्त सूचनाएंप्राप्त करता है।

58. ब्रिटेन के एलान टूरिंग (Alan Turing) सर्वप्रथम कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) की विचारधारा रखी। पर इस क्षेत्र में अपने योगदान के कारण जान मैकार्थी (John Mc Carthy) को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Father of Artificial Intelligence) का जनक कहा जाता है।

59. डेस्कटॉप पब्लिशिंग (DTP)का विकास मैकिन्टोस (Macintosh) कम्पनी द्वाराकिया गया।

60. इंटरनेट पर मुफ्त में उपलब्ध विश्व के सबसे बड़े इनसाक्लोपीडिया विकिपीडिया (Wikipedia) की स्थापना जिमी वेल्स (Jimmy Wales) ने किया।

60. बंग्लोर स्थित इंफोसिस टेक्नोलॉजी (Infosys Technology) का प्रारंभ एन. नारायणमूर्ति द्वारा 1981 में किया गया।

61. वर्तमान में विश्व का सबसे तेज सुपर तिआन्हे-2 कम्प्यूटर है/ इसे चीन ने 2013 ने बनाया/ (UPDATED)

62. भारत का सबसे तेज सुपर कम्प्यूटर प्रथ्वी है, जिसे भारतीय उष्ण देशीय मौसम विज्ञान अनुसंधान पुणे(INDIAN INSTITUTE OF TROPICAL METEOROLOGY PUNE) द्वारा किया गया है। (UPDATED)

63. विलियन हिगिनबॉथम (William Higgin Botham) ने 1958 में कम्प्यूटर के प्रथम वीडियो गेम का निर्माण किया।

64. माया II (Maya II) एक DNA कम्प्यूटर है जिसमें सिलिकॉन चिप की जगह DNA धागे का प्रयोग किया गया है।

65. माया (Maya) एक शक्तिशाली त्रिआयामी (3D) साफ्टवेयर है जिसका प्रयोग चलचित्रों और विडियो गेम में विशेष प्रभाव डालने के लिए किया जाता है।

66. एलन टूरिंग (Alan Turing) को आधुनिक कम्प्यूटर विज्ञान का जनक माना जाता है।

67 चार्ल्स बाबेज को कम्प्यूटर का जन्म दाता है

68. 5, 00, 00,000 लोगों तक पहुँचने में रेडियों को 38 वर्ष लगे और टेलिव्हिजन को 13 वर्ष, जबकि वर्ल्ड वाइड वेब को इसके लिए मात्र 4 वर्ष ही लगे।

69. Symbolics.com सबसे पहले रजिस्टर किया गया डोमेननेम था़।

70. प्रतिमाह दस लाख से भी अधिक डोमेननेम रजिस्टर होते हैं।

71. समस्त संसार में लगभग 1.06 बिलियन इंस्टैंट मैसेजिंग खाते हैं।

72. कम्प्यूटर प्रयोगकर्ता औसत रूप से प्रति मिनट 7 बार पलकें झपकाते हैं जबकि पलकें झपकाने की सामान्य दर 20 बार प्रति मिनट है।

73. ENIAC भारत का पहला सुपर कम्प्यूटर है

74. COBOL, C/C++, FORTRAN (Formula Translation), PASCAL, prolog, logo, UNIX आदि कम्प्यूटर भाषा है

75. Dot Matrix, DRUM, LINE printer आदि प्रिंटर है

76. कम्प्यूटर केवल बइनरी भाषा 0&1 ही समझता है

77. जोय स्टिक का प्रयोग कम्प्यूटर पर खेल (गेम) खेलने के लिए करते है

78. कम्प्यूटर मे फ़ंशनल-की F1, F2, F4, F5, F6 … F12. होती है

79. कम्प्यूटर मे डॉकयूमेंट का डिफाल्ट फाइल नाम .DOC होता है

80. कम्पाइलर उच्च स्तरीय भाषा (High Level Language) को मशीनी भाषा मे परिवर्तित करता है

81. FORTRAN (Formula Translation) पहली उच्च स्तरीय भाषा है, जिसका विकास IBM ने 1957 मे किया था

82. कोबोल भाषा का प्रयोग व्यवसायिक क्षेत्र मे किया जाता है

83. भारत मे नई कम्प्यूटर नीति नवम्बर 1984 को लागू हुई

84. भारत मे निर्मित प्रथम कम्प्यूटर सिद्धार्थ है

85. 16 अगस्त 1946 को बंगलूर के प्रधान डाक घर पहला कम्प्यूटर लगाया गया

86. भारत का प्रथम कम्प्यूटरीक्रत डाक घर दिल्ली का है

87. भारतीय जनता पार्टी भारत की ऐसी पहली राजनीतिक पार्टी है, जिसने इंटरनेट पर अपना वेब साइट बनाया था

88. चुम्बकीय डिस्क (Magnet Tape) पर आइरन आक्साइट की परत होती है

कम्प्यूटर उपयोग के फायदे और नुकसान Computer Advantages and Disadvantages in Hindi

कम्प्यूटर के लाभ Computer Advantages

निम्न सूची आज के क्षेत्र में कंप्यूटर के फायदे को दर्शाता है.-

हाई स्पीड: कंप्यूटर एक बहुत तेजी से उपकरण है. यह बहुत बड़ा डेटा के अलावा प्रदर्शन करने में सक्षम है. कंप्यूटर माइक्रोसैकेण्ड, nanosecond और भी पीकोसैकन्ड में गति की इकाइयों है. एक ही काम करने के लिए कई महीनों से खर्च कर सकते हैं जो आदमी की तुलना में यह कुछ ही सेकंड में गणना के लाखों प्रदर्शन कर सकते हैं.

शुद्धता: बहुत तेजी से होने के अलावा, कंप्यूटर बहुत सही कर रहे हैं. कंप्यूटर गणना 100% त्रुटि मुक्त प्रदर्शन किया गया है. कंप्यूटर 100% सटीकता के साथ सभी नौकरियों प्रदर्शन.

भंडारण क्षमता: मेमोरी कंप्यूटर के एक बहुत महत्वपूर्ण विशेषता है. कंप्यूटर मनुष्य की तुलना में बहुत अधिक भंडारण क्षमता है. यह डेटा की बड़ी मात्रा में स्टोर कर सकते हैं. यह ऐसे चित्र, वीडियो, पाठ, ऑडियो और किसी भी अन्य प्रकार के रूप में डेटा के किसी भी प्रकार के स्टोर कर सकते हैं.

परिश्रम: मनुष्य के विपरीत, एक कंप्यूटर एकरसता, थकान और एकाग्रता की कमी से मुक्त है. यह किसी भी त्रुटि और बोरियत पैदा करने के बिना लगातार काम कर सकते हैं. यह उसी गति और सटीकता के साथ दोहराया काम कर सकता है.

बहुमुखी प्रतिभा: एक कंप्यूटर एक बहुत बहुमुखी मशीन है. एक कंप्यूटर के लिए किया जाना नौकरियों प्रदर्शन में बहुत लचीला है. इस मशीन के विभिन्न विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित समस्याओं को हल करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. एक पल में, यह एक जटिल वैज्ञानिक समस्या है और यह एक कार्ड खेल खेल हो सकता है अगले ही पल को हल किया जा सकता है.

विश्वसनीयता: एक कंप्यूटर एक विश्वसनीय मशीन है. आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की विफलता मुक्त लंबे जीवन है. कंप्यूटर रखरखाव आसान बनाने के लिए तैयार कर रहे हैं.

स्वचालन कम्प्यूटर एक स्वचालित मशीन है. स्वचालन स्वचालित रूप से कार्य करने के लिए क्षमता का मतलब है. एक कार्यक्रम कंप्यूटर स्मृति में संग्रहीत कंप्यूटर यानी करने के लिए दिया जाता है एक बार, कार्यक्रम और शिक्षा मानव संपर्क के बिना कार्यक्रम के निष्पादन को नियंत्रित कर सकते हैं.

पेपर वर्क में कमी: एक संगठन में डाटा प्रोसेसिंग के लिए कंप्यूटर के उपयोग कागज काम और इस प्रक्रिया की गति में कमी आती है. इलेक्ट्रॉनिक फ़ाइलों में डेटा के रूप में प्राप्त किए जा सकते हैं और जरूरत पड़ने पर, फ़ाइलों की बड़ी संख्या के रखरखाव की समस्या कम हो जाता है.

लागत में कमी: एक कंप्यूटर स्थापित करने के लिए प्रारंभिक निवेश अधिक है, लेकिन यह काफी हद तक अपने लेन – देन में से प्रत्येक की लागत कम कर देता है.

कम्प्यूटर के नुकसान Computer disadvantages in Hindi

निम्न सूची आज के क्षेत्र में कंप्यूटर के नुकसान को दर्शाता है.

कोई बुद्धि नहीं: एक कंप्यूटर एक मशीन है और किसी भी कार्य को करने के लिए अपनी खुद की कोई खुफिया है. प्रत्येक और हर अनुदेश कंप्यूटर को दिया जाता है. एक कंप्यूटर अपने दम पर कोई भी निर्णय नहीं ले सकते.

निर्भरता: यह इंसान पर पूरी तरह से निर्भर है user.So के निर्देशानुसार यह समारोह प्रदर्शन कर सकते हैं.

वातावरण: कंप्यूटर के ऑपरेटिंग वातावरण धूल मुक्त और इसे करने के लिए उपयुक्त होना चाहिए.

किसी से नहीं कोई लगाव: कम्प्यूटर नहीं लग रहा है या भावनाओं है. यह एक इंसान के विपरीत लग रहा है, स्वाद, अनुभव और ज्ञान के आधार पर निर्णय नहीं कर सकता. निम्न सूची आज के क्षेत्र में कंप्यूटर के विभिन्न अनुप्रयोगों को दर्शाता है.

सुपर कम्प्यूटर Super Computer

सुपर कंप्यूटर, वर्तमान में उपलब्ध सबसे तेजी से कंप्यूटरों में से एक हैं। ये बहुत महंगे होते हैं और गणितीय गणना की भारी मात्रा में कार्यरत होते हैं, जो विशेष अनुप्रयोगों के लिए आवश्यक होती है। उदाहरण के लिए, मौसम की भविष्यवाणी, वैज्ञानिक सिमुलेशन, एनिमेटेड ग्राफिक्स, द्रव गतिशील गणना, परमाणु ऊर्जा अनुसंधान, इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन, और भूवैज्ञानिक डेटा का विश्लेषण (जैसे पेट्रो पूर्वेक्षण में)।

मेनफ़्रेम कम्प्यूटर

मेनफ़्रेम

मेनफ्रेम कम्प्यूटर आकार में एक बहुत बड़ा है और यहां तक ​​कि सैकड़ों या हजारों, एक साथ उपयोगकर्ताओं का समर्थन करने में सक्षम एक महंगी कंप्यूटर है. मेनफ्रेम समवर्ती कई कार्यक्रम कार्यान्वित. सॉफ्टवेयर एक साथ कई कार्यक्रमों के निष्पादन का समर्थन है.

कंप्यूटर नेटवर्क क्या है? computer network

एक कंप्यूटर नेटवर्क कई कंप्यूटरों जानकारी और संसाधनों को साझा करने के लिए एक दूसरे से जुड़े हुए हैं, जिनमें एक प्रणाली है.

विशेषताएँ

एक कंप्यूटर से दूसरे को शेयर संसाधन फ़ाइलें बनाएँ और एक कंप्यूटर में स्टोर, नेटवर्क पर जुड़े अन्य कंप्यूटर (एस) से उन फ़ाइलों का उपयोग नेटवर्क के भीतर एक कंप्यूटर के लिए एक प्रिंटर, स्कैनर, या एक फैक्स मशीन कनेक्ट और नेटवर्क के अन्य कंप्यूटर नेटवर्क पर उपलब्ध मशीनों का उपयोग करते हैं.

निम्नलिखित एक कंप्यूटर नेटवर्क स्थापना के लिए आवश्यक हार्डवेयर की सूची है.

  1. नेटवर्क केबल्स
  2. वितरक
  3. राऊटर
  4. आंतरिक नेटवर्क कार्ड
  5. विदेश नेटवर्क कार्ड

हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के बीच संबंध

पारस्परिक रूप से उनमें से कंप्यूटर एक उपयोगी उत्पादन का उत्पादन करने के लिए एक साथ काम करना चाहिए। सॉफ्टवेयर हार्डवेयर समर्थन के बिना उपयोग नहीं किया जा सकता। पर संचालित करने के लिए कार्यक्रमों के सेट के बिना हार्डवेयर का उपयोग किया और बेकार है नहीं किया जा सकता। कंप्यूटर पर किया एक खास नौकरी के लिए, प्रासंगिक सॉफ्टवेयर हार्डवेयर में लोड किया जाना चाहिए, हार्डवेयर एक समय खर्च है।

सॉफ्टवेयर विकास बहुत महंगा है और एक सतत खर्च है। विभिन्न सॉफ्टवेयर विभिन्न नौकरियों को चलाने के लिए एक हार्डवेयर पर लोड किया जा सकता है। एक सॉफ्टवेयर उपयोगकर्ता और हार्डवेयर के बीच एक अंतरफलक के रूप में कार्य करता है। हार्डवेयर एक कंप्यूटर प्रणाली के ‘दिल’ है, तो सॉफ्टवेयर अपने ‘आत्मा’ है। दोनों एक दूसरे के पूरक हैं।

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