बच्चों की नींद पर प्रदूषण का असर : देश के कई शहरों में वायु प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है, जिसका सबसे ज्यादा प्रभाव छोटे बच्चों पर पड़ रहा है। प्रदूषित हवा अब उनकी नींद तक को प्रभावित करने लगी है। इस विषय पर जानकारी दे रहे हैं डॉ. एल.एच. घोटेकर।

हाल के दिनों में देश के कई हिस्सों में वायु गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, छोटे बच्चों का इम्यून सिस्टम पूरी तरह विकसित नहीं होता, इसलिए वे प्रदूषण के दुष्प्रभावों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। धूल, धुआं और हानिकारक कणों के संपर्क में आने से उन्हें सांस लेने में कठिनाई, खांसी, गले में खराश और थकान जैसी समस्याएं होने लगती हैं। हवा में मौजूद जहरीले तत्व शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा घटा देते हैं, जिससे बच्चों के मस्तिष्क और नींद के पैटर्न पर बुरा असर पड़ता है।

जब बच्चे प्रदूषित हवा में सांस लेते हैं, तो उनके श्वसन तंत्र में सूजन और जलन बढ़ जाती है। यह स्थिति रात के समय और भी अधिक परेशानी का कारण बनती है, जिससे उनकी नींद बारबार टूटती है या अधूरी रह जाती है। ऑक्सीजन की कमी के चलते नींद हल्की पड़ जाती है, जिससे दिनभर थकान, चिड़चिड़ापन और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई जैसी दिक्कतें सामने आती हैं। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहे, तो यह बच्चों की शारीरिक वृद्धि और मानसिक विकास दोनों को प्रभावित कर सकती है। इसलिए, प्रदूषण के इस दौर में बच्चों की नींद और स्वास्थ्य की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।

प्रदूषण से बच्चों की नींद और सेहत ऐसे रखें सुरक्षित

लेडी हार्डिंग हॉस्पिटल के डॉ. एल.एच. घोटेकर का कहना है कि बच्चों को प्रदूषण के प्रभाव से बचाने के लिए घर के अंदर की हवा को शुद्ध रखना सबसे जरूरी है। इसके लिए दिन में कम से कम एक बार घर के कमरों को वेंटिलेट करें, लेकिन ऐसा सुबह या देर रात करें जब वायु प्रदूषण का स्तर अपेक्षाकृत कम होता है। हवा में मौजूद हानिकारक कणों को हटाने के लिए एयर प्यूरीफायर का उपयोग करना भी फायदेमंद होता है।

डॉ. घोटेकर सलाह देते हैं कि जब तक जरूरी न हो, बच्चों को बाहर खेलने के लिए न भेजें, खासकर तब जब AQI (एयर क्वालिटी इंडेक्स) बहुत खराब हो। यदि बाहर जाना अनिवार्य हो, तो बच्चों को मास्क अवश्य पहनाएं। उनकी डाइट में ताजे फल, सब्जियां और विटामिन C से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल करें ताकि उनका इम्यून सिस्टम मजबूत बना रहे।

सोने से पहले कमरे की धूलमिट्टी साफ करना और बच्चों को हल्की गर्म भाप लेने की आदत डालना भी उपयोगी है। इससे सांस की नलियां खुली रहती हैं, सांस लेने में आसानी होती है और नींद की गुणवत्ता बेहतर होती है।

ये भी जरूरी

बच्चों के कमरे में मनी प्लांट या स्नेक प्लांट जैसे इनडोर पौधे लगाना फायदेमंद होता है, क्योंकि ये हवा को शुद्ध करने में मदद करते हैं।

घर के अंदर अगरबत्ती, धूपबत्ती या सिगरेट का धुआं बिल्कुल न करें, ताकि हवा प्रदूषित न हो।

बच्चों को दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पिलाएं, जिससे शरीर से हानिकारक टॉक्सिन्स बाहर निकल सकें।

सोने से पहले बच्चों को मोबाइल या टीवी स्क्रीन से दूर रखें, ताकि उनकी नींद की गुणवत्ता बेहतर बनी रहे।

साथ ही, ठंड और स्मॉग के मौसम में डॉक्टर से नियमित जांच करवाना भी जरूरी है, ताकि किसी भी स्वास्थ्य समस्या का समय रहते पता चल सके।