Yoga vs Walking for diabetes : अगर आप ब्लड शुगर कंट्रोल करने के लिए दवाइयों के साथ एक बेहतर लाइफस्टाइल अपनाने की सोच रहे हैं, तो यह आर्टिकल आपके लिए बेहद काम का साबित हो सकता है। आमतौर पर योग और वॉकिंग (Yoga vs Walking) दोनों ही ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में अहम भूमिका निभाते हैं, लेकिन इन दोनों के बीच के फर्क को समझकर आप अपनी सेहत के लिए बेहतर विकल्प चुन सकते हैं।
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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। तेज रफ्तार जिंदगी में ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रण में रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है। ऐसे में अक्सर लोग यह सोचते हैं कि डायबिटीज कंट्रोल के लिए योग बेहतर है या वॉकिंग? चलिए आज हम इसी सवाल का जवाब ढूंढते हैं और जानते हैं कि इन दोनों में से कौन–सा तरीका आपके लिए अधिक लाभकारी हो सकता है।
Yoga vs Walking for diabetes : वॉकिंग
पैदल चलना एक सरल और सुविधाजनक व्यायाम है, जिसे कोई भी व्यक्ति कभी भी और कहीं भी कर सकता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके लिए किसी विशेष उपकरण या स्थान की जरूरत नहीं होती। ब्लड शुगर को नियंत्रण में रखने के लिए वॉकिंग के कई महत्वपूर्ण फायदे हैं।
- तेज असर: खाना खाने के बाद 10-15 मिनट की हल्की वॉक भी ब्लड शुगर को बढ़ने से रोक सकती है। यह मांसपेशियों को ग्लूकोज का इस्तेमाल करने में मदद करती है, जिससे शुगर का स्तर नीचे आता है।
- वेट लॉस: नियमित वॉकिंग कैलोरी बर्न करती है और वजन कम करने में मदद करती है, जो सीधे तौर पर इंसुलिन सेंसिटिविटी को बेहतर बनाता है।
- स्ट्रेस से राहत: वॉकिंग से एंडोर्फिन रिलीज होते हैं, जो तनाव को कम करते हैं। तनाव भी ब्लड शुगर को बढ़ा सकता है, इसलिए इसे कम करना फायदेमंद है।
- हेल्दी हार्ट: यह दिल को हेल्दी रखती है और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखती है, जो डायबिटीज के मरीजों के लिए बहुत जरूरी है।
यह सिर्फ वॉकिंग काफी है?
वॉकिंग शरीर के ऊपरी हिस्से पर अधिक प्रभाव नहीं डालती और न ही यह लचीलापन या मांसपेशियों की ताकत बढ़ाने में बहुत अधिक सहायक होती है।
योग
योग केवल शारीरिक मुद्राओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्राणायाम, ध्यान और मानसिक शांति का एक संपूर्ण अभ्यास है। अब जानते हैं कि ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में योग किस तरह सहायक होता है
- स्ट्रेस मैनेजमेंट: योग स्ट्रेस हार्मोन (जैसे कोर्टिसोल) को कम करने में बेहद असरदार है, जो सीधे तौर पर ब्लड शुगर के स्तर को प्रभावित करते हैं। तनाव कम होने से शरीर की इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ती है।
- पैनक्रियाज की फंक्शनिंग: कुछ योगासन पेट के अंगों, खासकर पैनक्रियाज को एक्टिव करते हैं। पैनक्रियाज ही इंसुलिन बनाता है, इसलिए इसकी बेहतर फंक्शनिंग शुगर कंट्रोल में मदद करती है।
- मसल्स की ताकत और फ्लैक्सिबिलिटी: योग मांसपेशियों को मजबूत बनाता है और शरीर की फ्लैक्सिबिलिटी बढ़ाता है। मजबूत मांसपेशियां ग्लूकोज का बेहतर इस्तेमाल करती हैं।
- मानसिक शांति: योग एकाग्रता और मानसिक शांति दिलाता है, जिससे आप अपनी सेहत का बेहतर ध्यान रख पाते हैं।
- ओवरऑल हेल्थ: यह पाचन, नींद और ब्लड सर्कुलेशन को भी सुधारता है, जो डायबिटीज मैनेजमेंट के लिए जरूरी हैं।
क्या इसमें कुछ कमी है?
यह ध्यान रखना जरूरी है कि योग से उतनी तेजी से कैलोरी बर्न नहीं होती, जितनी कि तेज वॉकिंग से होती है। साथ ही, योग को प्रभावी ढंग से सीखने के लिए अधिक प्रयास और उचित मार्गदर्शन की आवश्यकता हो सकती है।
क्या है ज्यादा असरदार?
दोनों ही वॉकिंग और योग ब्लड शुगर कंट्रोल के लिए बेहतरीन विकल्प हैं, लेकिन इनकी कार्यप्रणाली अलग–अलग होती है:
अगर आप जल्दी और आसान तरीका चाहते हैं ब्लड शुगर को मैनेज करने का, तो वॉकिंग एक बेहतरीन शुरुआती विकल्प हो सकता है। खासतौर पर भोजन के बाद की हल्की वॉक काफी फायदेमंद साबित होती है।
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वहीं, अगर आप एक संपूर्ण और दीर्घकालिक समाधान चाहते हैं, जो तनाव को कम करने, मांसपेशियों को मजबूत बनाने और मानसिक शांति प्रदान करने में भी मदद करे, तो योग एक ज्यादा प्रभावी विकल्प हो सकता है।