Ikkis Disclaimer Controversy : बॉलीवुड के ‘ही-मैन’ धर्मेंद्र (Dharmendra) के फैंस के लिए साल 2026 की शुरुआत जितनी भावुक थी, उतनी ही विवादों से भरी भी साबित हो रही है। उनकी बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘इक्कीस’ (Ikkis) सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। लेकिन चर्चा फिल्म की कहानी या एक्टिंग से ज्यादा, फिल्म के अंत में दिखाए गए एक ‘डिस्क्लेमर’ को लेकर हो रही है।
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जी हाँ, आपने सही सुना! Ikkis Disclaimer Controversy इस समय इंटरनेट पर टॉप ट्रेंड बना हुआ है। लोग दो गुटों में बंट गए हैं—कोई इसे फिल्म मेकर्स की हिम्मत बता रहा है, तो कोई इसे गैर-जरूरी विवाद। आइए विस्तार से जानते हैं कि आखिर माजरा क्या है।
क्या है ‘इक्कीस’ की कहानी?
फिल्म ‘इक्कीस’ 1971 के भारत-पाक युद्ध के रियल लाइफ हीरो, सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल की वीरता पर आधारित है। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन के नाती अगस्त्य नंदा ने अरुण खेत्रपाल का किरदार निभाया है, जबकि धर्मेंद्र उनके पिता (ब्रिगेडियर एम.एल. खेत्रपाल) की भूमिका में नजर आए हैं। जयदीप अहलावत ने फिल्म में एक पाकिस्तानी सैन्य अधिकारी की भूमिका निभाई है।
वो डिस्क्लेमर, जिसने मचा दिया बवाल (Ikkis Disclaimer Controversy)
फिल्म खत्म होने के बाद स्क्रीन पर एक डिस्क्लेमर आता है, जिसे देखकर दर्शक हैरान रह गए। इस डिस्क्लेमर में कुछ ऐसी बातें लिखी गई हैं जो सीधे तौर पर पड़ोसी देश और उसकी सेना पर निशाना साधती हैं।
डिस्क्लेमर के मुख्य बिंदु:
- फिल्म में दिखाया गया पाकिस्तानी सैनिक (ब्रिगेडियर निसार) का अच्छा व्यवहार मात्र एक ‘अपवाद’ (Exception) है।
- पड़ोसी देश (पाकिस्तान) की सेना पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
- युद्ध और शांति दोनों समय में पाकिस्तानी सेना ने भारतीय नागरिकों और सैनिकों के साथ क्रूर व्यवहार किया है।
- भारतीय नागरिकों को हमेशा सतर्क और तैयार रहने की जरूरत है।
यही वो शब्द हैं जिन्होंने सोशल मीडिया पर Ikkis Disclaimer Controversy को जन्म दिया है।
सोशल मीडिया पर छिड़ा ‘शब्द युद्ध’
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले ट्विटर) और इंस्टाग्राम पर इस डिस्क्लेमर को लेकर बहस तेज हो गई है।
- एक पक्ष का कहना है: “फिल्म मेकर्स ने बिल्कुल सही किया। हमें हकीकत को छिपाना नहीं चाहिए। पाकिस्तान का इतिहास गवाह है कि उन्होंने हमेशा पीठ पीछे वार किया है।”
- दूसरे पक्ष का तर्क: “सिनेमा जोड़ने का काम करता है, नफरत फैलाने का नहीं। धर्मेंद्र जी ने खुद अपनी अंतिम इच्छा में कहा था कि यह फिल्म भारत और पाकिस्तान दोनों देशों के लोगों को देखनी चाहिए। यह डिस्क्लेमर उनके विजन के खिलाफ है।”
धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म और उनकी ‘अधूरी ख्वाहिश’
यह विवाद इसलिए भी ज्यादा गहरा गया है क्योंकि धर्मेंद्र अब हमारे बीच नहीं हैं। नवंबर 2025 में उनके निधन के बाद ‘इक्कीस’ उनकी विदाई फिल्म बन गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, धर्मेंद्र इस फिल्म को लेकर बहुत उत्साहित थे। उन्होंने अपने एक आखिरी वीडियो मैसेज में कहा था, “मैं चाहता हूँ कि भारत और पाकिस्तान दोनों इस फिल्म को देखें।”
अब फैंस सवाल उठा रहे हैं कि क्या यह डिस्क्लेमर फिल्म की मूल भावना के साथ न्याय करता है? कुछ यूजर्स का मानना है कि यह डिस्क्लेमर सेंसर बोर्ड के दबाव में या फिर ‘पॉलिटिकल नैरेटिव’ सेट करने के लिए आखिरी समय में जोड़ा गया है।
जयदीप अहलावत का किरदार और विवाद का कनेक्शन
फिल्म में जयदीप अहलावत ने पाकिस्तानी ब्रिगेडियर निसार का रोल किया है। फिल्म के एक सीन में उनके और भारतीय सेना के बीच सम्मान और मानवीय व्यवहार दिखाया गया है। शायद इसी मानवीय पहलू को ‘बैलेंस’ करने के लिए मेकर्स ने अंत में यह डिस्क्लेमर डाला कि “ऐसा व्यवहार अपवाद है।” आलोचकों का कहना है कि यह डिस्क्लेमर फिल्म की सिनेमैटिक खूबसूरती को कम कर देता है।
क्यों देखें ‘इक्कीस’? (विवादों से परे)
भले ही Ikkis Disclaimer Controversy हेडलाइंस में हो, लेकिन एक सिनेमा प्रेमी के तौर पर इस फिल्म को मिस करना मुश्किल है। यहाँ कुछ कारण दिए गए हैं:
- धर्मेंद्र का आखिरी जादू: पर्दे पर ही-मैन को आखिरी बार देखना किसी इमोशनल राइड से कम नहीं है। उनकी मौजूदगी फिल्म के हर फ्रेम को खास बनाती है।
- अगस्त्य नंदा का ट्रांसफॉर्मेशन: ‘द आर्चीज’ के बाद अगस्त्य ने इस फिल्म में खुद को पूरी तरह साबित किया है। एक फौजी के किरदार में उनकी गंभीरता काबिले तारीफ है।
- श्रीराम राघवन का निर्देशन: ‘अंधाधुन’ और ‘बदलापुर’ फेम डायरेक्टर ने वॉर ड्रामा को एक अलग स्तर पर पहुंचाया है।
- देशभक्ति का जज्बा: अरुण खेत्रपाल की शहादत की कहानी हर भारतीय की आँखों में आँसू और सीने में गर्व भर देती है।
निष्कर्ष: क्या फिल्म का बहिष्कार सही है?
आजकल किसी भी छोटी बात पर ‘Boycott’ का ट्रेंड चल पड़ता है। Ikkis Disclaimer Controversy को लेकर भी कुछ लोग फिल्म के बहिष्कार की मांग कर रहे हैं। लेकिन हमें समझना होगा कि एक फिल्म सैकड़ों लोगों की मेहनत होती है।
डिस्क्लेमर फिल्म का एक हिस्सा हो सकता है, लेकिन पूरी फिल्म एक शहीद की वीरता और एक पिता के गर्व की कहानी है। धर्मेंद्र जी को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम उनकी आखिरी फिल्म को देखें और उनकी कला का सम्मान करें।
आपकी क्या राय है? क्या आपको लगता है कि फिल्म में ऐसा डिस्क्लेमर होना जरूरी था? या फिर सिनेमा को विवादों से दूर रखना चाहिए? कमेंट सेक्शन में हमें जरूर बताएं और इस पोस्ट को शेयर करना न भूलें!